लाभेश ग्‍यारहवें भाव लाभ भाव स्वामी का बारह भावों में फल


ग्‍यारहवें भाव (लाभ भाव) का बारह भावों में फल


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प्रथम भाव में
आपका जन्‍म अच्‍छे परिवार में होता है। आपके कई सारे दोस्‍त होते हैं। ग्‍यारहवे भाव के स्‍वामी की दशा में आपको खूब समृद्धि मिलती है। इस दौरान आपको कई अवसर भी प्राप्‍त होते हैं। बचपन में कोई परेशानी हो सकती है। आपका चरित्र बहुत मजबूत होता है। आप बहुत आत्‍मकेंद्रित होते हैं और जो भी करते हैं उसके लिए आपकी प्रशंसा होती है। आपकी सारी इच्‍छाएं पूरी होती हैं।
दूसरे भाव में
आप अपने बड़े भाइयों के साथ रहते हैं। पैसा कमाने के लिए आपको कई अच्‍छे अवसर मिलते हैं। आप अपने जीवन में संपन्‍न व्‍यक्‍ति बनते हैं। आप अपना घर और वाहन बना पाते हैं। दोस्‍तों द्वारा भी लाभ संभव है। आपका बिजनेस पार्टनर भी अच्‍छा होता है। आपका कोई दोस्‍त ही व्‍यापार में आपका साझेदार बन सकता है। आपको लिखना और पढ़ना बहुत अच्‍छा लगता है। आप ज्ञान और धन अर्जित करने के इच्‍छुक होते हैं। आप बैंकर, ब्रोकर आदि बन सकते हैं। बैकिंग और फाइनेंस सेक्‍टर में कार्य करें।
तीसरे भाव में
आप कला के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। आप संगीतकार या गायक बन सकते हैं। भाई का सहयोग मिलता है। आप बहुत साहसी लेकिन गैर जिम्‍मेदार होते हैं। आप हमेशा अपनी बात साबित करना चाहते हैं। इंटरनेट, पत्रकारिता, लेखन आदि से धन कमा सकते हैं। मोल-भाव करने में आप बढिया होते हैं।
चौथे भाव में
रियल एस्‍टेट, वाहन आदि आपकी आय का स्रोत बन सकता है। आपकी माता का आपके ऊपर बहुत नियंत्रण होता है। आप अपनी मां को बहुत प्रेम करते हैं। आपके विचार बहुत सकारात्‍मक होते हैं। इतिहास, अध्‍यात्‍म में आपकी रूचि होती है। आपका जीवनसाथी बहुत सुंदर और आकर्षित होता है। आप पेय पदार्थों की सेल्‍स या मार्केटिंग कर सकते हैं। समुद्री उत्‍पादों से आपकी आय होती है।
पंचम भाव में
आपको सच्‍चे प्‍यार की तलाश रहती है। संतान आपकी हर बात मानती है। सट्टे से पैसा कमाते हैं। आप अनुशासनात्‍मक जीवन जीते हैं। आप चंचल और फ्लर्टी स्‍वभाव के होते हैं। आप अच्‍छे ब्रोकर, निवेशक, स्‍पोर्ट्स पर्सन या मनोरंजन के क्षेत्र में काम कर सकते हैं।
छठे भाव में
आपको अपने मामा से लाभ मिलता है। अस्‍पताल आपके लाभ का स्रोत बन सकता है। कानूनी मसलों में भी आपको फायदा होता है। व्‍यापार से ज्‍यादा नौकरी में मुनाफा कमाते हैं। जीवन में एक स्‍तर पर आकर आपको सुख और समृद्धि दोनों मिलती है। आपको उत्तम सेहत और शरीर पाने की लालसा रहती है। सेहत को लेकर आप बहुत अनुशासन में रहते हैं।
सप्‍तम भाव में
आपके एक से ज्‍यादा विवाह होते हैं। विदेश यात्रा की संभावना है। आप बहुत खर्चीले होते हैं। आपका विवाह किसी संपन्‍न और प्रभावशाली परिवार में होता है। जीवनसाथी आपके लाभ का स्रोत बनता है। आपको जीवन में कई यात्राएं करनी पड़ती हैं। आपके कई प्रभावशाली दोस्‍त होते हैं।
अष्‍टम भाव में
अचानक से कोई काम मिल सकता है जिससे आपको धन लाभ होगा। मृत, रहस्‍यमयी, गुप्‍त या सेक्‍स रैकेट आदि से आपको अवसर मिल सकता है। अपने काम के लिए आपको जाना जाता है। आप अपने क्षेत्र में बेहतरीन होते हैं। अपने प्रोफेशन में आपके दुश्‍मन भी बहुत होते हैं। आपकी दीर्घायु होती है। भाई के साथ मतभेद रहता है। बचपन में परेशान रहते हैं।
नवम भाव में
आप बहुत भाग्‍यशाली होते हैं। आपकी कुंडली में ये बहुत शुभ योग होता है। आपको कभी भी पैसों की कमी नहीं होती है। यहां तक कि जीवन के बुरे दौर में भी आप दूसरों से बेहतर रहते हैं। भाग्‍य का पूरा साथ मिलता है। आप धार्मिक सोच वाले व्‍यक्‍ति होते हैं और धर्म आपकी रूचि रहती है। सरकारी या शक्‍तिशाली लोग भी आपका सम्‍मान करते हैं।
दशम भाव में
आप बहुत सफल व्‍यक्‍ति होते हैं। आप जो भी कार्य करें उसमें सफलता की ऊंचाईयां छूते हैं। आप हमेशा बड़ा सोचते हैं और अपने प्रयासों से उसे सच करने की भी कोशिश करते हैं। इसमें भाग्‍य का साथ भी आपको भरपूर मिलता है। आप दूसरों की सहायता करते हैं और समाज में नाम कमाते हैं। राजनीति में आपके संपर्क होते हैं और शक्‍तिशाली लोग भी आपको जानते हैं। बेहतर शिक्षा प्राप्‍त करते हैं। आपको कई पुरस्‍कार मिलते हैं।
ग्‍यारहवे भाव में
ये कुंडली में सर्वोत्तम योग माना गया है। प्रभावशाली लोग आपके मित्र होते हैं और आपको अपने भाई का भी सहयोग मिलता है। आपकी अ‍धिकतर इच्‍छाएं पूरी होती हैं। आपको अपने जीवन में कोई कमी महसूस नहीं होती। अपने कार्यों को पूरा करने के लिए भी आपको ज्‍यादा प्रयास नहीं करने पड़ते हैं। आपके लिए जीवन बहुत आसान होता है लेकिन सेहत संबंधित परेशानियां बनी रहती हैं।
बारहवे भाव में
व्‍यापार में नुकसान के योग हैं। आपकी फिजूलखर्ची और पैसा बर्बाद करने की वजह से आप आर्थिक रूप से कमजोर हो सकते हैं। विदेश में आपके अनेक दोस्‍त होते हैं। अपने जीवन के आखिरी चरण में आप अध्‍यात्‍म को अपना सकते हैं। आप बहुत बुरे कर्म करते है लेकिन अपने जीवन के तीसरे चरण में ईश्‍वर के प्रति आपकी आस्‍था बढ़ने लगती है।


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