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Showing posts from May, 2015

- बुध वक्री वृषभ राशि में

मेष वक्री ग्रह विपरीत प्रभाव दे देते हैं। बुध आपके पराक्रम और रिपु भाव का स्वामी है। आपको चाहिए की आप अपने सामाजिक और घरेलू संबंधों में धैर्य तथा संयम बनाये रखें। इस से आपकी ही प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। दूसरों पर अपनी धारणा को थोपिये नहीं। इस से सभी लोगों को तकलीफ होती है और पीठ पीछे बुराई के पात्र बनते हैं। शत्रुओं अथवा वे लोग जिनको आप जानते हैं की वो आपसे ईर्ष्या रखते हैं , उनसे दूर रहना ही सबसे अच्छा है। आपको इस समय में ग़लतफ़हमियाँ होने की बहुत गुंजाइश है अतः जिस से भी बात करें खुल कर हर बिंदु पर करें। हो सकता है की आपके सेल फ़ोन का नेटवर्क बार बार गड़बड़ हो और उसमें इंटरनेट भी धीमा चलने लगे। इस से क्रोधित होने की आवश्यकता नहीं है। ये स्वयमेव कुछ दिन बाद ठीक हो जाएगा। आप मेहनती और अर्जुन की तरह लक्ष्य पर सदा केंद्रित तो रहते ही हैं। इन सब सावधानियों से आपको और अधिक लाभ होगा। वृषभ लग्न हमारा पूरा शरीर भी दर्शाता है और मस्तिष्क भी। जब कोई ग्रह लग्न में आके वक्री होता है तो उसका प्रभाव हमारी विचारधारा पर भी पड़ता है। जन्म गत वक्री ग्रह और गोचर के फल अलग होते हैं। आपकी सोच

-सूर्य का वृषभ में गोचर

मेष आपको दांतों अथवा जीभ में कोई समस्या आ सकती है। प्रेम सम्बन्ध अच्छे बने हैं। विवाहित जीवन बढ़िया रहेगा। घर के दूसरे सदस्यों से बहस हो सकती है। आपको बिना कारण क्रोध आएगा। काम काज की स्थिति अच्छी रहेगी। व्यवसाय का क्षेत्र और विस्तृत कर सकते हैं। आप कोई कीमती सामान खो सकते हैं। आपका किसी उच्च अधिकारी से विवाद संभव है। वृषभ जीवनसाथी से गंभीर विवाद संभव है। आपको अपनी वाणी पर भी नियंत्रण रखना चाहिए। बुखार से आप परेशान हो सकते हैं। आपने लक्ष्य के लिए प्रयासों में वृद्धि करेंगे और हासिल करेंगे। आपका ज़िद्दी व्यवहार लोगों को परेशान कर सकता है। आपको पत्नी /पति पर अधिक व्यय करना पड़ सकता है। काम काज ठीक रहेगा। व्यवसाय में सामान्य स्थिति बनी रहेगी। धर्म में रूचि बढ़ सकती है। मिथुन नेत्रों में कुछ समस्या उत्पन्न हो सकती है। आपको बड़ा नुक्सान हो सकता है। आपका सामाजिक लोकाचार असहज रह सकता है। आपके व्यवहार से लोगों को असुविधा हो सकती है। विवाहित जीवन अच्छा बना रहेगा। प्रेम सम्बन्ध अच्छे रहेंगे। मित्रों पर भी व्यय होगा और कोई मित्र आपको मूर्ख भी बना सकता है। आपको अपने ख़र्चों पर नि

मंगल का वृषभ में गोचर

मेष यह गोचर आपके लिए सामान्य ही रहेगा। लग्नेश द्वितीय भाव में तो जाएगा किन्तु यह अष्टमेश भी है। आपको व्यर्थ के विवाद से बच कर रहना चाहिए और इस समय में घर परिवार में मिलजुलकर रहना चाहिए। अपनी इच्छा ज़बरदस्ती किसी पर नहीं थोपनी चाहिए। ऐसा करने से आपके प्रति सद्भावना में कमी आएगी और पीठ पीछे की बुराई के आप शिकार बनेंगे। भाग्य बहुत प्रबल नहीं रहेगा। शत्रुओं को आप पर हमला करने का मौका मिलेगा। वृषभ इस समय में आपको अधिक परिश्रम करना पड़ेगा। आपकी तबियत भी ख़राब रह सकती है और सिरदर्द की शिकायत भी आपको हो सकती है। निजी जीवन में क्लेश की स्थिति बहुत बार आ सकती है। यद्यपि मंगल सप्तमेश होकर सप्तम को देखेंगे किन्तु वह द्वादशेश भी है और उग्र प्रकृति का ग्रह है। इस कारण से आपको परेशानी हो सकती है। आपका व्यय भी अधिक होगा और आपके जीवन साथी की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। आपको व्यर्थ की यात्रा भी करनी पड़ सकती है। मिथुन भाइयों से विवाद की स्थिति बन सकती है। आपको पशुओं से भय की सम्भावना है। नींद में आपको भयावह स्वप्न भी आ सकते हैं। आपको दवा आदि में धन पर व्यय करना पड़ सकता है। अचानक हानि