Tuesday, January 20, 2015

MISFORTUNE YOGAS IN HOROSCOPE—कुंडली में भाग्यहीनता के योग



Kindly do not take as it is ….there are many things to be considered other than yogas .This is for general Information purposes only.

1)If saturn occupies 9th house ,asc lord and moon ar debilitated then the native is as a beggar .यदि शनि नवं भाव में हो ,लग्नेश और चन्द्रमा नीच हों तो मनुष्य भिक्षुक के जैसा जीवन यापन करता है .

२)यदि सूर्य और चन्द्रमा नीच हों अथवा नीचाभिलाशी हों तो अनेक भाग्य योगों को नष्ट करते हैं .If sun and moon are debilitated or neechabhilashi (planet going from its exalted sign towards its debilitation sign ) then they cause cancellation of many fortunate yogas.

3)Afflicted 9th lord causes many problems in life in its DBA ,भाग्येश का  खराब होना जीवन में कई विसंगतियां प्रस्तुत करता है अपनी दशा भुक्ति अंतर में .

४)यदि अष्टम में मंगल ,त्रिकोण में सूर्य और दशम में चन्द्रमा हो तो जातक भिखारी होता है .If mars is in 8th ,sun is in trine and moon in 10th makes one a beggar or like a beggar.

5)If 4th lord is combust,debilitated,in paapkartari,with natural malefics,having malefic aspects ,in enemy`s sign causes loss of property to the native .यदि चतुर्थेश नीच हो ,अस्त हो ,शत्रुक्षेत्री हो ,पाप द्रष्ट हो ,पापकर्तरी में हो तो जातक की भू सम्पात्ति को नष्ट कर सकता है .

६)यदि चतुर्थेश नीच का होकर द्वितियास्थ हो और उसके साथ पाप गृह हो तो भू संपत्ति का नाश कर सकता है .If 4th lord is debilitated and in 2nd house with natural malefic can cause complete loss of property to the native .

7)Even if 4th lord is in own sign but in 8th house with natural malefic will cause loss of property.यदि चतुर्थेश स्वग्रही होकर भी अष्टम में पाप ग्रहों के साथ हो तो संपत्ति का नाश करने में सक्षम होता है .

८)यदि सूर्य मेष का भी होकर तुला के नवांश में हो तो जातक को लक्ष्मी विहीन कर देता है .Sun even if exalted in asc but in libra navansha causes poverty to the native .

9)If sun and moon are in 7th and are aspected by saturn also cause pennyless ness to the native .यदि सूर्य और चंद्रमा सप्तम में हों और शनि से द्रष्ट हों तो भी जातक को मुद्रा विहीन कर सकते हैं .

१०)यदि शुक्र कन्या का ही राशी और नवांश में हो .If venus is in virgo in asc and navansha .

11)If saturn is in angle,moon in ascendant and jupiter in 12th house also causes poverty .यदि शनि केंद्र में हो ,चन्द्रमा लग्न में और ब्रहस्पति द्वादश में तो भी जातक को गरीबी देखनी पद सकती है .

उपरोक्त वर्णित सामान्य योग है जो की अपने अपने दशा इत्यादि में फलित होते है यदि जन्म कुंडली में अन्य कोई अच्छे योग न हों तो .आज कल ज्योतिष उप उप नक्षत्र स्वामी के परीक्षण तक चला गया है न की मात्र जन्म समय के योगों पर .अतएव यदि आपकी पत्रिका में ऐसा कोई योग हो भी तो चिंता न कीजिये .और न ही अनावश्यक पूजा पाठ के चक्कर में पढ़िए .धैर्य और इश श्रद्धा बहुत शक्तिशाली गुण होते हैं जो सब दोषों को मिटाने में पूर्ण सक्षम होते हैं .