Sunday, March 16, 2014

श्री गीरथ प्रसाद का चुनावी भविष्य


चुनावी बुखार सारे देश में फ़ैल चूका है , हर दल अपना हर संभव प्रयास कर रहा है जिससे वह अपनी सीट बचा सके.मैंने भी कृष्णामूर्ति पद्धति द्वारा यह जानने का प्रयास करा है की कौन सा प्रत्याशी जीतेगा और कौन हारेगा
इन्होने हाल ही में कांग्रेस का त्याग कर भाजापा को अपना लिया है और आइये देखते हैं कुंडली इनके विषय में क्या कहती है:



जीत के लिए नियम : यदि छठे भाव का उपनक्ष्त्र स्वामी ६,१०,११ में से किसी का कार्येष गृह है तो व्यक्ति जीत सकता है अन्यथा यदि वह गृह ४,५,१२ का कार्येष है तो वह हार जाता है. यदि वह दोनों प्रकार के भावों को सामान रूप से दर्शाता है तो महादशा अंतर और प्रत्यंतर स्वामी किन भाव के कार्येष हैं ये देखना चहिये
छठे भाव का उपनक्ष्त्र स्वामी मंगल चौथे भाव में है और केतु के उपनक्ष्त्र में है.
दशम का उपनक्ष्त्र स्वामी शनि है जो सूर्य के उपनक्ष्त्र में है. सूर्य नवें भाव में है.
एकादश भाव का उपनक्ष्त्र स्वामी शुक्र है जो अष्टम भाव में है . लग्नेश बुध भी अष्टम में ही है .चन्द्रमा इस समय शुक्र के उपनक्ष्त्र मैं है जो की अष्टम भाव में है.
२२-८-२०१५ तक शुक्र की ही महादशा और अन्तर चलेगा जो अष्टम भाव में बैठा है . यह गुरु के उपनक्ष्त्र में है जो लग्न में द्विस्वभाव राशी में है.
निष्कर्ष : इनकी रिकॉर्ड मतों से हार सुनिश्चित है.
उपाय : इनको अगर विजयश्री की इच्छा है तो इनको वृहद् स्तर पर माँ भगवती का भंडारा और दुर्गा कवच का अखंड जाप करना चहिये मतदान तिथि तक.