Friday, December 13, 2013

कुंडली मिलान : आज की प्रासंगिकता

कुंडली मिलान : आज की प्रासंगिकता
लगभग हर हिन्दू घर में , शादी इत्यादि में कुंडली मिलान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है .इसके बिना किसी हिन्दू परिवार में शादी नहीं होती. ये सभी जानते हैं . यह पद्धति कई वर्षों से हमारे यहाँ प्रयुक्त करी जा रही है . हम आजकल देख रहे हैं की लगभग सभी धर्मों में हिन्दू मुसलमान इसाई कोई भी हो , उनमें  तलाक की अधिकता होती जा रही है . स्त्री को मिलने वाले कानूनी अधिकारों का प्रयोग वोह आम तौर पर पति और उसके परिवार को दबाने के लिए करने लगी है और पति भी हर तरह से दमन चक्र चलते रहते हैं . जबकि विवाह पूरे गुण मिला कर पंडित की हामी से करा गया होता है . फिर कहाँ गलती हो रही है ?
अधिकतर लोग जो कुंडली मिलवाते है वोह सामान्यतः कुंडली प्रो नाम के एक सॉफ्टवेर का प्रयोग करते हैं , लगभग सभी पंडित भी उसी को देखते हैं . उसमें आठ आधारों पर लड़का लड़की में मिलापक बना दिया जाता है और उसी को सभी सत्य मानकर आगे बढ़ते हैं . उसमें कहा गया है की १८ अंक आने पर विवाह करा जा सकता है मगर ये नहीं कहा जाता की कौन से गुण पूरे मिलने चहिये ...नतीजा बाद में लड़का लड़की और उनके घरवाले भुगतते हैं .और ज्योतिष और ज्योतिषी दोनों को गाली देतेहैं .
दोष उस सॉफ्टवेर और पंडित और ज्योतिषी तीनों का उतना नहीं है जितना इस समय का है ....एकता कपूर छाप सीरियल और किराए की महँगी साड़ियाँ और वाहन देख देख कर किसी के भी मन का संतोष समाप्त हो सकता है . और ऊपर से बड़े बड़े घर और बड़ी बड़ी बातें . ये सब देखकर समाज का बहुत बड़ा वर्ग अपना सत्यानाश कर रहा है . हकीकत कुछ और ही है . विवाह मात्र पति को लूटने का साधन नहीं रह गया है बल्कि उसके संपूर्ण परिवार को प्रताड़ित करने का हेतु भी होता जा रहा है .मगर ऐसा हर घर में नहीं हो रहा येही परमात्मा का शुक्र है .
स्त्री का भी दोष नहीं है , उसे बचपन से शिक्षा ही गलत मिल रही है तो बड़ी होकर वोह सुधर तो जायेगी नहीं , बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए .
गुण मिलान की यह जो पद्धति प्रचलित है इसमें सबसे बड़ा दोष है की ये जन्म के समय के चंद्रमा पर आधारित है .चन्द्रमा किस नक्षत्र में था किस राशी में था आदि आदि और इसी आधार पर वर्ण , वश्य , तारा , योनी , गण , गृह्मैत्री ,भकूट आदि देखे जाते हैं .इनमें चंद्रमा और जन्म नक्षत्र ही मुख्या आधार बनाये गए हैं .
मैं उन सम्माननीय पंडितों से पूछना चाहता हूँ की क्या जातक जीवन भर बड़ा नहीं होता ? जो जन्म के समय के नक्षत्र , दशा गोचर आदि थे क्या वोही जीवन भर रहते हैं ? फिर ऐसी पद्धति का अनुसरण क्यूँ करें जिसका आधार जन्म के साथ ही समाप्त हो चूका है . या तो जन्म होते ही शादी करवा दीजिये तो भी बात समझ में आती है , मगर ये मुमकिन नहीं है .... फिर कोई ऐसी पध्दति क्यों नहीं अपनाई जाती है जिससे वर्तमान में सत्य सामे उजागर हो ...२०-३० वर्ष पुराना तथ्य नहीं . लड़का लड़की के प्रत्येक भाव और भावाधिपति का एक दूसरे से सम्बन्ध और अन्य भी कई बातें हैं जो बहुत बार देखि नहीं जाती हैं और ज्योतिष को कलंक लगता है .
अगर ये गली गली में बैठे हुए पण्डे और बड़े बड़े आफिस दाल कर बैठे ज्योतिषी लोग इसमें तार्किक सुधार कर लेंगे तो मैं समझता हूँ की एक सही विकल्प लड़के या लड़की को दे पायेंगे . लकीर का फ़कीर बनने से जीवन दो अनजान लोगों का जीवन नष्ट होता है और रिनानुबंधन में हम फंसते हैं .