Tuesday, December 31, 2013

मेष २०१४ वर्षफल

मेष २०१४ वर्षफल
यह फलादेश लग्न आधारित है.
मेष राशी में आश्विन , भरिणी , कृत्तिका नक्षत्र आते हैं जिनके केतु ,शुक्र ,सूर्य अधिपति हैं . मेष राशी का स्वामी मंगल है और मेष में जन्मे जातक बहादुर , झगडालू , हठी होते हैं. इनमें आगे बढ़ने की तथा सफल होने की और भोतिक जीवन को भोगने की प्रबल इच्छा होती है . विपरीत लिंगी जातको से संसर्ग में इनको बहुत आनंद प्राप्त होता है और ये अपनी ही करनी से अपने लिए समस्याएं खड़ी करते हैं. ये जीवन में बहुत धनोपार्जन करते हैं जिसमें की इनका स्वयं का प्रयास सबसे महत्त्वपूर्ण होता है मगर ये सफलता इनको बहुत अधिक श्रम करने के बाद ही प्राप्त होती है .  
पारिवारिक जीवन इस वर्ष संघर्षपूर्ण ही रहेगा . आप परिवार को अधिक समय नहीं दे पायेंगे और स्वयं को समस्याओं से घिरा हुआ पायेंगे. आप कई बार परिवार से दूर होंगे और यह भी मनमुटाव का एक कारन बनेगा .मार्च के महीने में कई समस्याएँ आ सकती हैं और आपका बाकी चीज़ों से ध्यान भंग हो सकता है .जून के महीने से आपके जीवन में कई बदलाव आने के योग हैं तथा पिता और परिवार के बड़े सदस्यों को लाभ मिलने के भी योग बनेंगे .
स्वास्थय भी इस वर्ष आपको हतोत्साहित करेगा .सामान्य बुखार , वायरल तथा मलेरिया से बचने की कोशिश कीजिये .पेट में अत्यधिक अम्लीयता बनी रहेगी तथा दर्द की शिकायत भी एकदम से उठ पड़ेगी . अतः खाने पीने का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है . मार्च अप्रैल के महीने में  विशेष सावधानी रखने की आवश्यकता है .इस वर्ष स्वास्थय आपको काफी परेशान करेगा .
शुक्र गृह सामान्यतः २२-२४ दिनों में एक राशी में रहता है जब वह मार्गी होता है .शुक्र द्वारा ही प्रेम , रोमांस आदि भाव नियंत्रित होते हैं . आपकी कुंडली में सूर्य पंचमेश होने से रोमांस तथा प्रसंगों का स्वामित्व पता है और शुक्र पत्नी भाव का स्वामी बनता है .इस वर्ष आप कोई बहुत उम्मीद न रखें और विवाहित जातकों के लिए यह वर्ष समस्या ही खड़ी करते रहने वाला है .आपके व्यय इन कारणों पर बहुत होंगे और सब व्यर्थ ही साबित होंगे .शनि रहू की सप्तम भाव में युति अति अशुभ है .जून के बाद स्थिति में सुधार आएगा .  
मेष जातकों को सामान्यतः दूसरों से अधिक परिश्रम करना पड़ता है . उनके लक्ष्य भी बहुत बड़े होते हैं .आप जन्मजात कठिन परिश्रमी व्यक्ति हैं – इस वर्ष आपको यह सिद्ध करना पड़ेगा अन्यथा आपके सारे प्रयास निष्फल हो जायेंगे . जो जातक मीडिया , संचार ,कानून , धर्म ,तथा रसायन आदि क्षेत्रों में हैं उनको सफलता अवश्य मिलेगी .जून के बाद स्थिति बेहतर हो जायेगी .
आर्थिक स्थिति कमोबेश सामान्य ही रहेगी .शेयर अथवा अन्य किसी प्रकार के सट्टे में पैसा नहीं लगाना चहिये अन्यथा हानि होने की प्रबल सम्भावना है .आप अपना घर इस वर्ष खरीद सकते हैं और जुलाई के बाद इसकी संभावना प्रबल है . आपको अपने शौक पर खर्च करने की आदत होती है , इस वर्ष खर्च पर नियंत्रण रखने का प्रयास करना अच्छा रहेगा .
शिक्षा के क्षेत्र में आपको बहुत सफलता के योग बनेंगे .कानून ,वाणिज्य ,अभियांत्रिकी , रसायन के छात्र बहुत सफल रहेंगे तथा आपके शिक्षा के लिए विदेश जाने के योग भी बनेंगे .सभी प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं में भी आप सफल रहेंगे .


Aries 2014 Horoscope

Aries 2014 Horoscope
Aries 2014 Horoscope (Vedic horoscope/ Ascendant sign based)
There are 3 constellations in Aries which are Ashwini, Bharini, Krittika ruled by Ketu, Venus, Sun. Aries is ruled by Mars which is soldier in planetary cabinet. Aries born are courageous, Aggressive, have marks of their face and hands and are always ready to mingle into a fight. They take great pleasure in having union with opposite sex and invite trouble themselves. They also earn a huge amount of money by their own efforts and guts which comes to them after hard labour.

Family life in the year is going to be tough. You will not be able to give time to your family members and there will be problems all around. You will be moving away from home many times and that will be a reason for discord in the family. In the month of march there will be unwanted troubles in home front and you will be losing focus from other things. You will get more self centered from march onwards and you will see major changes from June. There will be gains to your father and other elders in the family after June.

Health will be another front, which will disappoint you in the beginning of the year. Chances of getting caught in fever, viral disease are very high. Also there will be too much acidity in your belly till July and problem of acute pains will also emerge. So it will be wise to be cautious and do not involve much into junky foods and eat normal home meal. This year mostly health is going to be giving you many problems. March April is the time when you should be most preventive in your habits.


Venus takes around 22-24 days to cross a sign when in direct motion. Venus governs love romance and all such joyful things. Sun is the lord of affairs and venus if the lord of spouse for you. There are not good things happening in the love front and expenses will be created by it with no fruitful results. For married people, Rahu and Saturn in 7th house will be destroying what so ever peace is there till june but from june things will get better for you.

Aries people have to work harder than others to achieve their goals and they are born hardworkers. This year you will have to prove this dictum, otherwise efforts are bound to go in vain. Natives in the field of media, Communications, Law, Religion etc will be shining bright. For others it is a tough call. After june you will perform much better and there will be a distinct difference in your performance.

Finances are going to be normal. It will be wiser to not put money in speculation etc otherwise, losses are indicated. Purchase of a new home is also there for those with good balances. July onwards there are good chances of your doing so. The tendency of being spendthrift is always there with you this year so control it for better future.

Education is going to be very good this year. Students of Law, Commerce, Engineering, Research, Chemical sciences will have good time this year. The pursuit of higher education will also be fulfilled and you can go abroad for higher studies. Competitions in the month of June July will be very favorable for you.


Tuesday, December 24, 2013

वक्री शुक्र का गोचर और आम प्रभाव

वक्री शुक्र का गोचर और आम प्रभाव

२२ दिसम्बर को शुक्र वक्री हो गया है और यह १ फरवरी २०१५ को मार्गी होगा .ब्रहस्पति पहले से ही वक्री चल रहा है अतः विश्व भर में शुभता की कमी आएगी. शुक्र को विवाह , सम्भोग, सौंदर्य , ऐशोआराम , प्यार आदि का मुख्य गृह माना जाता है .नेत्रों पर भी इसका अधिकार है और सुन्दर बालों पर भी. मनुष्य की कामेच्छा की तीव्रता भी इसी गृह पर निर्भर करती है .
इस गोचर से विश्व में अनेतिकता और बढ़ेगी और दुराचार की घटनाएं बढ़ जायेंगी. आँखों में समस्या , स्त्र्यों को मासिक धर्म में रुकावट और तकलीफ होगी ,महँगी गाड़ियाँ और उपकरण दिक्कत करेंगे. नामी हस्तियों के पारिवारिक जीवन में कलह और क्लेश बढ़ेगी , नामी स्त्रीयां बदनाम हो सकती हैं. कुछ लोगों को सर्जरी भी करानी पड़ेगी. स्थापित लोगों से भी दुराचार करने और होने की घटनाएं सामने आएँगी .
विभिन्न जातकों पर इसका निम्न प्रभाव हो सकता है :
१)       मेष : पारिवारिक जीवन में कलह और अशांति , बच्चों की बीमारी पर खर्च , शादी की बात में देरी होना , प्रेम सम्बन्ध आगे बढ़ सकते हैं.
२)       वृषभ : निर्णय क्षमता में कमी आएगी , जब तक आप निष्कर्ष पर आयेंगे तब तक बात हाथ से निकल जायेगी.आँख गले और यौनांगों में दिक्कत आ सकती है.
३)       मिथुन : मिथुन जातकों को अधिक परेशानी नहीं है , उनकी कई इच्छाएँ पूर्ण हो सकती है , पारिवारिक जीवन में कुछ आम मतभेद रहेंगे .आपको सिर्फ खर्च और यात्रा पर नियंत्रण करना है.
४)       कर्क : आपको धनलाभ , सेहत , आदि सब मिलेगा .धार्मिक प्रभाव आपके ऊपर रहेगा. पति या पत्नी द्वारा लाभ हो सकता है .
५)       सिंह : उच्च अधिकारीयों से सहयोग मिलेगा , छोटी यात्रा करेंगे , खर्च हद से बहार हो जायेंगे , धर्म का प्रभाव बना रहेगा .भौतिकतावाद कम होगा .
६)       कन्या : विपरीत लिंग के जातक द्वारा मानहानि की सम्भावना है , आप अपनी बात पर कायम नहीं रह पायेंगे , लोग आपके विरद्ध कार्य करेंगे ,झगडे और खर्च बढ़ेंगे .
७)       तुला : आपको कोई गंभीर रोग हो सकता है , पारिवारिक जीवन और बेकार होगा , अनिर्णय की स्थिति रहेगी ,आपसे मूर्खता पूर्ण गलतियां होंगी और हंसी का पात्र बनेंगे .
८)       वृश्चिक : आपके लिए यह गोचर अशुभता लिए हुए है .
९)       धनु : आप अस्पताल में भर्ती हो सकते हैं , आपको नाम तो मिलेगा पर उसका लाभ आप नहीं ले पायंगे.
१०)    मकर : यह आपके लिए बहुत शुभ है , आपको धन का लाभ होगा और कामनाएं पूर्ण होगी .
११)    कुम्भ : इस लग्न के जातक सुर्खियाँ बना सकते हैं , नाम और शौहरत मिल सकती है , कुछ छोटी बीमारी हो सकती है मगर अधिक चिंता का विषय नहीं है .

१२)    मीन : आपको छुअछोत की बीमारी हो सकती हैं , यह समय सामान्य ही रहेगा अधिक या अधिक बुरा कुछ भी नहीं है .

Saturday, December 21, 2013

RETROGRESSION OF VENUS: NATAL AND MUNDANE EFFECTS

RETROGRESSION OF VENUS: NATAL AND MUNDANE EFFECTS

Venus will be moving to Capricorn on 5th December 2013 in the afternoon. Venus is a planet connected directly with the material happiness of an individual and all the comforts of physical body are given by it, be it anything.Venus is the chief governer of music. Good Venus promotes lavishness in a person. On 22nd December it will turn retrograde after travelling around 4 degrees in Capricorn. On 1st February it will get direct after moving back upto 19 degrees in Sagittarius. On 31st march it will move to Aquarius after a long travel. Venus will be travelling in constellations of Venus, Sun, Moon, and Mars in direct and retrograde motion. There will be an interchange of signs by Saturn and Venus for this long period. The other benefic Jupiter is also retrograde these days.
Venus is also called Goddess of love, marriage, Beauty, comforts. It is also called Mahalakshmi, Wife of Lord Vishnu. Venus is also called one eyed. It rules  yajurveda and vasanth rithu(April and may). Affliction to venus can generate eye diseases apart from others. One`s passion depends upon the strength of Venus and aspects it receives in natal and transit positions. Venus is not being aspected by any planet as of now but when mars will enter Libra, venus will have bad aspect of Mars as Saturn and rahu will conjoin him.
I feel that this retrogression will pave way for further immorality as venus is going 6-8 to Jupiter, the most moral and benefic of all. There will be eye problems, irregular cycles to females, problems in male genitals, stuffs of lavishness will not work properly, i.e. luxury cars may breakdown suddenly for no apparent reason, and costly gadgets may ill perform. Female natives need to be more careful in their day to day activity and do not put trust on anyone blindly, particularly those in metros and working in dark shifts. However, Capricorn is a friendly sign of venus but the mooltrikona of venus is carrying rahu. Thus, precaution will be good. There could be some troubles in the families of film stars, musicians, actors. Joint families will see some discord in their day-to-day life. We may hear news of raids on brothels, sex rackets may be busted and popular females losing fame due to their unscrupulous acts. There is not going to be much happening though as mars will come to libra for few days and will retrograde. Between 8th January to 4th February 2014 , venus will be aspected be Mars and this is the period when we can witness the above incidents with more severity. Some natives will have to undergo surgery. There will be acts of misconduct  from responsible people towards women.
On various ascendants its effects can be:
1)      ARIES:  There will be marital discord and unpleasant atmosphere in the family, there will be expenses on ailments of children. Negotiations of marriage may get delayed. Love affairs can go to next level.
2)      TAURUS: There will be dilemma in decision-making, you will take extra time, and by the time, things will be out of your reach or influence. There will be physical problems in eyes, genitals, sore throat, cough, and cold.
3)      GEMINI: You will have many wishes fulfilled, but in the last part. Initially you will be going through some distorts in personal life; nothing serious is there for you. You just need to control expenses and long travels.
4)      CANCER: You will see monetary gains, health improvements, and fulfillment of your wishes. There will be a religious bent also these days. Spouse will be the source of gains and good news.
5)      LEO: There will favors from higher officials and short travels around. There will be expenditure beyond control and religious travels. Materialism will be off for some time.
6)      VIRGO: There is threat to reputation from opposite sex, there will be expenses and quarrels, people will plot against you and you will not be able to keep your word.
7)      LIBRA: Librans are going through a bad phase since long and this retrogression will further increase it, you may acquire chronic disease. There will be pressure at work. You will make silly mistakes and may become a laughing stock.
8)      SCORPIO: This is going to be a good period for you for some time, but then you will face discords in personal life, professional life and will have to do useless travels and there will be wastages.
9)      SAGITTARIUS: You will get name, fame favors from higher authorities, but you will not be able to take benefit of any of it. There could be hospitalization.
10)   CAPRICORN: This transit is going to be beneficial for you, there are hidden gains, good time and all goodness of sorts for you.
11)   AQUARIS: You can expect gains and fame at the same time, not for all, there will be newsmakers of this ascendant and we will see them. There could be ailment for small time but not much to worry about.
12)   PISCES: You need to be careful from viral infections, there will be ailment for short time and there will be gains and good time. This transit will prove average for you. You need to be careful from materialistic instincts.





Monday, December 16, 2013

काम शक्ति - काम इच्छा - और ज्योतिष

काम शक्ति - काम इच्छा - और ज्योतिष
हमारे पुरुष प्रधान समाज में पौरुष का आकलन व्यक्ति के लैंगिक प्रदर्शन पर अक्सर किया जाता रहा है. इस विषय पर लोग आज भी खुल कर बात नहीं करते किन्तु दबी जुबां में चर्चा समाप्त भी नहीं होती है. इस लेख में मैं प्रयास करूंगा की यदि आप यौन दुर्बलता आदि से ग्रस्त हैं तो उसके ज्योतिषीय उपाय क्या हो सकते हैं. ज्योतिष बहुत ही विस्तृत विज्ञान है और मनुष्य की हर बात को इस से समझा जा सकता है. आज के युग में जिसमें की शुक्र की प्रधानता बढती जा रही है , हम रोज़मर्रा के जीवन में देखते है की सम्भोग शक्ति से सम्बंधित दावा और मशीनें बढती जा रही है जो की कुछ नहीं है , लोगों की शर्म का मनोवैज्ञानिक आर्थिक दोहन है. सम्भोग की समयसीमा की अधिकता पौरुष का मार्का बन गयी है. जब हम किसी दवाई की दूकान में जाते हैं तो सामने ही हमें पुरुषों की सम्भोग शक्ति बढाने वाले तेल , पाउडर , कैप्सूल , गोली और स्त्रीयों के वक्ष बढाने वाले उत्पाद दीखते हैं , जीवन रक्षक और आवश्यक दवा पीछे कहीं पड़ी रहती है. लोग भी अंधों की तरह एक के बाद एक नुस्खा आजमा रहे हैं बिना किसी सफलता के , सम्भोग आज के जीवन की प्राथमिकता बन गया है . हमारे शास्त्रों में सम्भोग के लिए भी विधान है किन्तु उसको भूलकर लोग अपनी कामेच्छा शांत करने में लगे हुए है .
इन सबसे होता यह है की जो था वोह भी चला जाता है, ज्योतिष में इन सबके लिए भी उपाय हैं जो की देर सबेर फायदा भी करते हैं और मनोवैज्ञानिक रूप से सहारा भी देते हैं. सभी ग्रहों के लिंग ज्योतिष में निर्धारित है जो की निम्न हैं :
१)       सूर्य     : पुरुष
२)       चन्द्र    : स्त्री
३)       मंगल   : पुरुष
४)       बुध     : नपुंसक , किन्तु अन्य ग्रहों की युति दृष्टि से अन्य योनी .
५)       गुरु     : पुरुष
६)       शुक्र    : स्त्री
७)       शनि    : नपुंसक
ग्रहों के अनुसार ही राशियों का भी निर्धारण है जैसे हर दूसरी राशी स्त्री राशी है , अतः मेष पुरुष और वृषभ स्त्री राशी हुई , इसी प्रकार से मीन तक लीजिये. स्वाभाविक रूप से जब एक पुरुष गृह स्त्री राशी में या स्त्री गृह पुरुष राशी में विचरण करेगा तो भाव के फल में फर्क पड़ेगा. यह सामान्य बात है . कुंडली के सप्तम और अष्टम भाव सेक्स के प्रकार और यौनांगों से सम्बंधित होते हैं. नपुंसकता आमतौर पर मनोवैज्ञानिक दुर्बलता होती है और यह ठीक करी जा सकती है बशर्ते व्यक्ति के सम्बंधित अंग किसी बिमारी या दुर्घटना के कारण नष्ट न हो गए हों.
कुछ योग जिनसे नपुंसकता आ सकती है ,
१)       राहू या शनि द्वित्य भाव में हों , बुध अष्टम में तथा चन्द्रम द्वादश में हो ,
२)       यदि चन्द्रमा पापकर्तरी में हो तथा अष्टम भाव में बुध या केतु हों ,
३)       यदि शनि और बुध अष्टम भाव में हों तथा चन्द्र पाप कर्तरी में हो ,
यह कुछ योग हैं जिनसे यौन दुर्बलता आ सकती है किन्तु यह मनोवैज्ञानिक और अस्थिर होती है ना की सदा के लिए . इन अंगों की प्रकृति अश्तामाधिपति के अनुसार इस प्रकार हो सकती है ,
१)       यदि सूर्य अष्टमेश है तो व्यक्ति के अंग अछे होंगे और ठीक से कार्य करेंगे ,
२)       यदि चन्द्र है तो व्यक्ति के अंग अछे होंगे किन्तु वह सेक्स को लेकर मूडी होगा ,
३)       यदि मंगल है तो व्यक्ति के अंग छोटे होंगे किन्तु वह बहुत ही कामुक होगा ,
४)       यदि बुध है तो व्यक्ति सेक्स को लेकर हीन भावना से ग्रस्त होगा ,
५)       यदि गुरु है तो व्यक्ति व्यक्ति पूर्ण स्वस्थ होगा ,
६)       यदि शुक्र है तो व्यक्ति के अंग सुंदर होंगे और उसकी काम क्रिया में तीव्र रूचि रहेगी ,
७)       यदि शनि है तो व्यक्ति के अंग की लम्बाई अधिक होगी किन्तु क्रिया में शिथिलता और विकृति रह सकती है ,
अष्टम भाव में बैठे ग्रहों के अनुसार फल में परिवर्तन आ जायेगा, बुध यदि अष्टम में हो , स्वराशी का ना हो और उस पर कोई शुभ दृष्टि भी न हो तो व्यक्ति काम क्रिया में असफल रहता है, राहू के होने से व्यक्ति अत्यंत भोगवादी हो जाता है तथा केतु से उसके अन्दर तीव्र उत्कंठा बनी रहती है.
व्यक्ति का यौन व्यवहार सप्तम भाव से प्रदर्शित होता है ,सप्तम भाव और उसमें बैठे ग्रहों के कारण फल में अंतर आता जाता है ,
१)       सप्तम में यदि मंगल हो तो या दृष्टि हो तो व्यक्ति काम क्रिया में क्रोध का प्रदर्शन करता है और सारा आनंदं नष्ट कर देता है ,
२)       यदि गुरु हो तो व्यक्ति आदर्श क्रिया संपन्न करता है ,
३)       यदि शनि हो व्यक्ति का बहुत ही हीन द्रष्टिकोण होता है और वह जानवरों जैसा व्यवहार भी करता है ,
४)       यदि राहू हो तो व्यक्ति ऐसे बर्ताव करता है जैसे कुछ चुरा रहा हो ,
५)       यदि केतु हो तो व्यक्ति शीघ स्खलन से ग्रस्त होता है ,
६)       यदि शुक्र हो तो व्यक्ति पूर्ण आनंद प्राप्त करता है ,
७)       यदि बुध हो तो व्यक्ति नसों में दुर्बलता और जल्दी थक जाने से ग्रस्त होता है ,
८)       यदि चन्द्र अष्टम मैं हो तो व्यक्ति काम क्रिया में बहुत आनंद देता है किन्तु चन्द्र की दृष्टि निष्प्रभावी होती है ,
९)       यदि सूर्य हो तो व्यक्ति क्रिया में अति उत्तेजना का प्रदर्शन करता है
ग्रहों की युति , दृष्टि , दशा , और गोचर के अनुसार व्रक्ति का प्रदर्शन बदलता चला जाता है और सभी तथ्यों को समक्ष रखने पर ही सही निर्णय पर आया जा सकता है. यदि व्यक्ति किसी प्रकार की दुर्बलता या व्याधि से ग्रस्त है तो एक अछे यौन चिकिसक और मनोवैज्ञानिक का परामर्श लेना बेहतर है बजाय किसी पोस्टर पम्फलेट वाले झोला छाप गली मोहल्ले में में मिलने वाले स्वघोषित चिकित्सक अथवा फूटपाथ पर झुग्गी बना के बैठे हुए और्वेदाचार्यों से.
ज्योतिषीय परामर्श से आप न सिर्फ अपनी दुर्बलता को दूर कर सकते है बल्कि जीवन में धनात्मक ऊर्जा का संचार भी कर सकते हैं. आपको वह रत्ना धारण करना चहिये जिससे आपकी शक्ति का विकास हो और योग मुद्रा में अश्विनी मुद्रा का अभ्यास करना चहिये. धूम्र पान को सदा के लिए त्यागना होगा क्योकि उस से बड़ा पौरुष शक्ति का शत्रु कोई दूसरा नहीं है. खान पान की आदतों में सुधार करना चहिये और शराब की मात्र संयमित होनी चहिये. इश्वर की प्रार्थना सर्वप्रथम है .

एक अच्छा ज्योतिषी आपको आपकी दशा गृह गोचर आदि द्वारा उचित परामर्श दे सकता है और किस इश्वर की आराधन करनी चहिये वह भी बता सकता है . ज्योतिष की सहायता लेना दीर्घकाल में कहीं अधिक उपयोगी सिद्ध होगा बजाय इन सब वैद्य और झोला छाप चिकित्सकों के चक्कर लगाने से. साथ ही सही वास्तविक  चिकित्सक और मनोवैज्ञानिक परामर्श का भी आपको सहारा लेना होगा.

YOUR LIBIDO DURATION AND ASTROLOGY

YOUR LIBIDO DURATION AND ASTROLOGY

There are many talks, misconceptions, views on sexual activity in our society, most of the time people do not like to discuss it in open, and it continues. I will be discussing here the behavior of a native in the intimate act and reasons and possible cure for ill performance. Erotic power or sexual power is something which has been a very under the seat thing in our society. It applies to men mostly and as we are a paternal and male chauvinistic society, this could be the reason people are reluctant to talk about it. In an era of Venus domination, we are witnessing many things from aphrodisiacs to elongating machines etc... Which are doing nothing but just taking the advantage of this silence and feeling of shame , it is nothing but a clear-cut psychological blackmail assuring a brighter sunrise, which never happens. Duration of intercourse is something, which has become a thing to be proud of, and attracts a lot of attention from the obvious counterparts.  

When we go to a medical shop, in front we see tablets, syrups, oils and powders of increasing sex power of male and increasing breast sizes of a female. The life saving drugs etc are behind all this crap. Are they really working or people are just keeping on trying one option after another to saturate their lust? In my opinion, they are simply wasting money for something useless after a period of life. In our shastras it is clearly mentioned about when to have intercourse and why to do it in the first place. 

Astrology has answers for you for this matter of life also which has become the foremost priority of males and females equally. In this article, I will be talking about men only. All planets are assigned genders, which are:

1)      Sun            : Male

2)      Moon        : Female

3)      Mars          : Male

4)      Mercury    : Eunuch, but changes with conjunctions and aspects.

5)      Jupiter       : Male

6)      Venus        : Female

7)      Saturn       : Eunuch

Every alternate sign is a female sign starting from Aries, so Taurus is a female sign. Obviously when a male planet will be occupying a female sign there will be interchange of attributes and thus there will be a different picture coming out. The seventh and eighth house deals with the sex organs. Impotence, if not physically damaged organs, is purely psychological and needs proper counseling and medication in majority of the cases. Going to a psychiatrist or a MBBS V.D. specialist is a far better option than wasting money in all such things or going to self proclaimed doctors of sexual power enhancers whose photos we see in and around every public toilet and railway stations and other places. 

Some combinations, which may render a person impotent, are:

1)      Rahu or Saturn in second, mercury in 8th and moon in 12th house,

2)      If moon is hemmed between malefic and eighth house be occupied by ketu or mercury, 

3)      If Saturn and mercury are in eighth house and moon afflicted by rahu,

These are few of the combinations for rendering a person impotent, but it is not permanent until unless physically damaged. About the nature of the organs the planetary effects are:

1)      If the eighth house belongs to Jupiter, the sexual organs will be of normal size and function,

2)      If the eighth house belongs to Saturn then the organs will be longer and languid with abnormal functions,

3)      If the eighth house belongs to venus then the native has beautiful organs and they enjoy their intimate life,

4)      If the eighth house belongs to Mars then the organ will be small but the desire will be high and person will be sensuous

5)      If the eighth house be of mercury then the native will suffer from inferiority complex with regard to sexual matters,

6)      If the eighth house belongs to sun, the person will have virile organs and the functions will be normal,

7)      If the eighth house belongs to moon then the person will have normal organs and functionality will depend upon the mood of the person.

The planets occupying eighth house change the above results, mercury, in eighth, not in own house and not aspected by benefics will make a person disappointing in sex life; otherwise it will be a normal function. Rahu in eighth makes a person maniac for the act and ketu imparts hypersensitivity for the same.

Sexual behavior of a native: It depends upon the nature of the 7th house and the planets occupying the same:

1)      If the seventh house is occupied or aspected by mars, the person will be angry in the act and will destroy the pleasure,

2)      If the same planet is Jupiter then the person makes ardent love,

3)      If Saturn then the person will have mean outlook for the union and may behave like animal in the act,

4)      If rahu then the person behaves as if he is stealing something and will be shy in the act,

5)      If Ketu then person will be hypersensitive and will have premature ejaculation,

6)      If the Venus then the person takes great delight in the act,

7)      If mercury then the person suffers from nervous exhaustion and premature ejaculation,

8)      If Moon then the person will take great delight in the act but mere aspect of moon is not sufficient,

9)      If sun then the person will be aggressive in the act.

The various conjunctions, dashas, and transit change the patterns accordingly and one has to take in account all the factors to judge properly about the intimate acts of a native. If you are suffering from a inferiority complex about nonperformance of your organ, then it is better to consult a regular doctor and a psychiatrist. You should wear gem stone of the planet which will enhance your durability in the act. A good astrologer can prescribe you the stone after taking into account all the factors from planets to dashas to transits. In yoga, there is one ashwini mudra, which one must practice for increase in the durability, it is very easy and one can do it anywhere anytime. You can google for the same. Food habits need to be taken care of and smoking should become past if you really want to cure yourself. Smoking is the biggest killer of the drive and durability both. Alcohol need to be controlled. If you are not able to reproduce then worshipping God with all the above measures is necessary, which God you should worship will again be told by your horoscope. Apart from all this, you need to develop positivity in yourself by changing your surroundings and habits as much as possible. I am sure that all these steps will slowly but surely make you better in intimate acts.